नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में संचालित रावघाट अंजरेल माइंस से मिलने वाली जिला खनिज न्यास (DMF) राशि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर नारायणपुर के हिस्से की राशि कांकेर जिले को दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया. जनप्रतिनिधियों ने इसे नारायणपुर जिले के साथ विश्वासघात बताते हुए तत्काल राशि ट्रांसफर की मांग की.
जनप्रतिनिधियों का आरोप- “नारायणपुर का हक छीना”
जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम की अध्यक्षता में पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने कहा कि रावघाट परियोजना का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा नारायणपुर जिले में स्थित है, और वर्तमान में खनन अंजरेल माइंस नारायणपुर क्षेत्र में ही चल रहा है, जबकि कांकेर वाले हिस्से में कोई खनन नहीं हो रहा. इसके बावजूद वर्ष 2021 से अब तक की DMF राशि कांकेर जिले को मातृत्व जिला मानकर दी जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है.
हमारे साथ छल किया गया. खनन के दुष्परिणाम से खराब सड़कें, प्रदूषण, भौगोलिक नुकसान, ग्रामीणों की स्वास्थ्य समस्याएं सब नारायणपुर के लोग झेल रहे हैं, लेकिन राशि किसी और जिले को दी जा रही है-नारायण मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष
58 करोड़ की राशि का दावा
जिला पंचायत सदस्य संतनाथ उसेंडी ने आंकड़ों के साथ जानकारी दी कि वर्ष 2021 से अब तक लगभग 58 करोड़ रुपये DMF राशि नारायणपुर जिले को मिलनी चाहिए थी. पिछले वर्ष पत्राचार के बाद मात्र 15 करोड़ रुपये कांकेर से नारायणपुर को मिले. अभी भी लगभग 43 करोड़ रुपये की राशि लंबित है. उन्होंने कहा कि इस राशि के अभाव में जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.
सात दिनों के अंदर कांकेर यदि हमारा हक का पैसा नारायणपुर को नहीं देगा तो उग्र आंदोलन होगा जिसे सभी शामिल होंगे- संतनाथ उसेंडी, जिला पंचायत सदस्य
कलेक्टर कार्यालय का जवाब
पूरे मामले पर कलेक्टर कार्यालय ने बताया कि DMF राशि को लेकर कांकेर जिले से लगातार पत्राचार किया जा रहा है और जवाब का इंतजार है.
जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के माध्यम से शासन से मांग रखी
1. नारायणपुर जिले को अब तक की पूरी DMF राशि तत्काल हस्तांतरित की जाए
2. रावघाट परियोजना अंतर्गत BSP के खनिपट्टा अनुबंध का निष्पादन नारायणपुर जिले से किया जाए.
औद्योगिक असर की आशंका
जानकारी के अनुसार रावघाट माइंस अंतर्गत अंजरेल खनन क्षेत्र से रोजाना लाखों टन लौह अयस्क भिलाई इस्पात संयंत्र तक भेजा जाता है. वर्तमान में संयंत्र को सबसे ज्यादा कच्चा माल यहीं से मिल रहा है. ऐसे में यदि नारायणपुर में बड़ा आंदोलन होता है, तो राज्य के औद्योगिक विकास और इस्पात उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
