अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, 139 डॉलर प्रति बैरल को पार

 अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ समय से आग लगी हुई है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का इसपर सीधा असर देखने को मिल रहा है। सोमवार को कच्चे तेल के भाव में साल 2008 के बाद सबसे बड़ा उछाल आया और इसकी कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का बुरा असर दिखने लगा है।

सोमवार को 10 डॉलर की तेजी आईरूस के यूक्रेन पर हमले के खिलाफ पश्चिमी देश लगातार रूस पर अपने प्रतिबंध तेज करते जा रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसके चलते ब्रेंट 139.13 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 130.50  डॉलर पर पहुंच गया। सोमवार को तड़के कच्चे तेल की कीमत में एकाएक 10 डॉलर की तेजी आ गई

रूस के तेल सप्लाई पर प्रतिबंध की तैयारीअमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच रूस से तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बारे में बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक दिन पहले इस विषय पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक की थी। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने एक पत्र में कहा कि सदन वर्तमान में मजबूत कानून की तलाश कर रहा है जो रूस को वैश्विक अर्थव्यवस्था से और अलग कर देगा। कच्चे तेल में उछाल का बड़ा कारणकच्चे तेल में आई इस तेजी के प्रमुख कारण की बात करें तो रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तेज होने के कारण अमेरिका, यूरोप और सहयोगी देशों ने रूस से तेल नहीं खरीदने का मन बनाया है। इसके कारण डिमांड के मुकाबले सप्लाई काफी कम रह गई और कच्चा तेल उछाल भरता हुआ 2008 के बाद अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है।

रूस दूसरा बड़ा तेल उत्पादकगौरतलब है कि पुतिन के युद्ध की घोषणा के बाद से ही एनर्जी एक्सपोर्ट में व्यवधान की आशंका बढ़ गई थी, जो अब साफतौर पर दिखाई देने लगी है। आपको बता दें कि रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, जो मुख्य रूप से यूरोपीय रिफाइनरियों को कच्चा तेल बेचता है। यूरोप के देश 20 फीसदी से ज्यादा तेल रूस से ही लेते हैं।

185 डॉलर पर पहुंच सकता है क्रूड ऑयल रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और आगे बढ़ता है तो क्रूड ऑयल के दाम 185 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। यहां आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर का इजाफा होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल का दाम 50 से 60 पैसे बढ़ जाता है। ऐसे में उत्पादन कम होने और सप्लाई में रुकावट के चलते इसके दाम में तेजी आना तय है और उम्मीद है कि कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15 से 22 रुपये तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है।

भारत पर दिखाई देगा बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव पिछले 14 साल के उच्च स्तर पर 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों के इजाफे के बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बीते चार महीनों से यथावत बने हुए हैं। ऐसे में तेल कंपनियों को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। हाल ही में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में घरेलू तेल कंपनियों के बढ़ रहे घाटे पर कहा है कि पिछले दो महीनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने के कारण सरकार के स्वामित्व वाले खुदरा तेल विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है

15 रुपये महंगा हो सकता है पेट्रोलदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर कई रिपोर्टें सामने आ रही है। इन रिपोर्टों की मानें तो आने वाले दो-चार दिनों के भीतर ही देश में 15 से 22 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। घरेलू तेल कंपनियों को सिर्फ लागत की भरपाई के लिए 16 मार्च 2022 या उससे पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतें 12.1 रुपये प्रति लीटर बढ़ानी होंगी।

85 फीसदी कच्चे तेल का आयातआयात किए जा रहे कच्चे तेल की कीमत भारत को अमेरिकी डॉलर में चुकानी होती है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित होते हैं यानी ईंधन महंगे होने लगते हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती है तो जाहिर है भारत का आयात बिल बढ़ जाएगा।

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Pradesh Samna
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