उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हर साल नंदा देवी महोत्सव मनाया जाता है. यह त्योहार देवी नन्दा और उनकी बहन सुनंदा की पूजा के लिए समर्पित है. नैनीताल के नैना देवी मंदिर में इस बार 29 अगस्त से महोत्सव की शुरुआत हो गई है, जो 5 सितंबर तक चलेगा. इस महोत्सव में बकरे की बलि देने की परंपरा काफी पुरानी है, लेकिन पिछले 14 सालों से बकरों की बलि देने पर हाईकोर्ट की ओर से प्रतिबंध था. हालांकि, अब हाईकोर्ट की ओर से पशु बलि देने की इजाजत दे दी गई है.
परंपरागत रूप से देवी को प्रसन्न करने और समृद्धि की कामना के लिए पशु बलि दी जाती थी. पशु क्रूरता रोकथाम कानून और बढ़ते पशु अधिकार आंदोलनों के चलते इस पर साल 2010 में रोक लगाई गई थी. मंदिर में पशुओं के प्रवेश और बलि दोनों पर उस समय रोक लगाई गई थी. इसके खिलाफ नैनीताल के रहने वाले पवन जाटव और बाकी लोगों ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. याचिका में बताया गया कि ये एक बहुत पुरानी प्रथा है. ऐसे में इस प्रथा को रोके जाने से लोगों की आस्था को ठेस पहुंच रही है. उत्तराखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को इजाजत दी गई. अब नंदा देवी महोत्सव के दौरान स्लॉटर हाउस बनाकर बलि दी जा सकेगी. हालांकि, मंदिर के अंदर अब भी पशु बलि पर रोक रहेगी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर से की जाएगी.