डेटिंग ऐप पर कैसी पार्टनर चाहते हैं पुरुष? नई स्टडी में हुआ खुलासा लाइफ स्टाइल By Nayan Datt On Jul 28, 2025 जब बात शादी की आती है, तो कहते हैं कि लड़कियां बहुत चूजी होती है. वह पैसे वाले, हैंडसम और सफल लड़का चाहती हैं. लेकिन क्या वाकई ऐसा है. क्योंकि हर कोई अपनी तरह या अपने से ज्यादा का पार्टनर एक्सेप्ट करता है वो फिर चाहे महिला हो या फिर पुरुष दोनों की एक्सपेक्टेशन पार्टनर के लिए बहुत ज्यादा होती हैं. लेकिन सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी अपने से ज्यादा डिजायरेबल महिला चाहते हैं. यह भी पढ़ें महिला ने 4 महीने में कम किया 25 किलो वजन, बस रात को करती थी… Aug 31, 2025 फिट रहने के लिए सारा तेंदुलकर करती हैं पिलेट्स, जानें इसे… Aug 29, 2025 हाल ही में एक स्टडी के हवाले से बताया गया है कि पुरुष भी अपने सी कहीं ज्यादा डिजायरेबल महिला चाहते हैं. जबकि महिलाएं लगभग अपने स्टेटस का ही लड़के की तलाश में होती हैं. स्टडी के मुताबिक लड़के डेटिंग ऐप पर कैसी लड़की चाहते हैं आइए जानते हैं इसके बारे में क्या कहती हैं स्टडी? PLOS One जर्नल में छपी एक ताजा इंटरनेशनल स्टडी में चेक रिपब्लिक की एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के करीब 3,000 हेटेरोसेक्शुअल यूजर्स का ब्यौरा किया गया. इसमें रिसर्चर्स ने पाया कि टीम ने पाया कि, “पुरुष उन महिलाओं में अपनी दिलचस्पी दिखाते हैं जो उनसे “ज्यादा डिजायरेबल होती हैं, जबकि महिलाएं आमतौर पर अपने समान डिजायरेबल वाले पुरुषों चाहती हैं. शोध से पता चला कि महिलाएं कभी-कभी “औसतन थोड़ा कम डिजायरेबल साथी चुनती हैं. कैसे डेटिंग ऐप पर मिलता है मैच? इस डेटिंग ऐप पर महिलाओं की संख्या की तुलना में पुरुष ज्यादा हैं. महिलाओं को ज्यादा स्वाइप और मैसेज मिलने की भी यही वजह हो सकती हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया कि डिजिटल डेटिंग वर्ल्ड में महिलाएं अपने आप ऊंची पोजीशन पर थीं, लेकिन इसके बाद भी रिसर्च में पाया कि कई महिलाएं अपने से थोड़े कम डिजायरेबल पुरुषों को भी एक्सेप्ट कर लेती हैं. जबकि पुरुष हमेशा अपने से ऊपर की महिला को एक्सेप्ट करते हैं. कैसे डेटिंग ऐप पर मिलता है मैच? रिसर्चर्स का कहना है कि अगर पुरुष सही मायने में सीरियस रिलेशनशिप चाहते हैं, तो उन्हें अपने स्टैंडर्ड थोड़ा कम करने की जरूरत है. क्योंकि बार-बार रिजेक्ट होने के बाद मैच एक जैसे लेवल के लोगों का बनता है. यानी कि यहां पर हाई रिस्क, हाई रिजेक्शन का फार्मूला यहां काम नहीं करता है. इस स्टडी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी जिसमें कुछ यूजर्स का ने महिलाओं को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि महिलाओं को अपने स्टैंडर्ड कम करने चाहिए क्योंकि 90 प्रतिशत लड़कों को तो कोई मैच ही नहीं मिलता! Share