भोपाल:गैस पीड़ित मरीजों के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए कैंसर अस्पताल की बेहद जरूरत है। गैस राहत विभाग के तहत चल रहे रसूल अहमद सिद्दिकी पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर को कैंसर अस्पताल के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। यह बात भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग मंत्री विश्वास सारंग ने गुरुवार को कही। विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विस्तृत योजना तैयार कराई जाए, ताकि जल्द से जल्द गैस पीड़ित मरीजों के लिए कैंसर अस्पताल तैयार किया जा सके।मंत्री ने गैस राहत विभाग की ओर से संचालित 6 अस्पताल, 6 डिस्पेंसरी और सीएमएचओ कार्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग की मरम्मत कराने को कहा है। ऐसे में उक्त कार्याें के लिए 23.76 करोड़ के बजट का प्रस्ताव कार्यपालन यंत्री सिविल और विद्युत यांत्रिकी की ओर से दिया गया। मंत्री ओर से प्रस्ताव को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।विभाग की ओर से 2655 उपकरणों की जरूरत का प्रस्ताव पेश किया गया है। मंत्री ने उपकरणों की सूची संबंधित अस्पताल के अधीक्षक, सीएमएचओ गैस राहत को दो दिन में दोबारा जांचकर प्रस्ताव देने को कहा है। यही नहीं गैस पीड़ितों के आर्थिक पुनर्वास के लिए पहले से स्वीकृत राशि का आंकलन कर प्रस्तावित कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जीवन ज्योति कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है। इसके अलावा गैस राहत अस्पतालों में फायर और इलेक्ट्रिक ऑडिट कराने की बात भी उन्होंने कही।12 हजार से ज्यादा गैस पीड़ित कैंसर से जूझ रहे हैंवर्तमान में गैस पीड़ितों के लिए कैंसर बेहद घातक साबित हो रहा है। आलम यह है कि शहर में 12 हजार से ज्यादा गैस पीड़ितों को अलग-अलग तरह का कैंसर है। इसमें सबसे ज्यादा गाल ब्लेडर, लंग्स कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, रेक्टल कैंसर, स्टमक कैंसर, बोन कैंसर, मुंह का कैंसर, ब्लड कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के मरीज हैं।बावजूद इसके बीएमएचआरसी अस्पताल में 2016-17 से कैंसर के मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है। तत्कालीन डायरेक्टर डॉ. मनोज पांडे कैंसर सर्जन थे। उनके जाने के बाद से ही यहां कैंसर मरीजों का इलाज बंद है। वर्तमान में तीन निजी अस्पतालों को कैंसर के मरीजाें के लिए अधिकृत किया गया है।
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