भोपाल। भोपाल की एक महिला यात्री अपनी बेटी के पास ब्रिसबेन (आस्ट्रेलिया) गई थी। वहां से लौटने के लिए ब्रिसबेन से दिल्ली तक के लिए सिंगापुर एयरलाइंस से टिकट कराया था, लेकिन इस बीच उनकी बेटी की तबीयत खराब हो गई और उन्होंने अपना टिकट कैंसिल करा दिया। तीन दिन बाद महिला के पति का देहांत हो गया और अचानक उन्हें भारत लौटना पड़ा। एयरलाइंस ने टिकट की राशि वापस नहीं की।
सात माह बाद उनकी बेटी ने ईमेल के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी और टिकट की राशि की मांग की। इस पर एयरलाइंस ने सहानुभूतिपूर्वक राशि लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन 90 फीसद राशि काटकर सिर्फ पांच हजार रुपये लौटाए। महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, अंजुम फिरोज व सदस्य प्रीति मुद्गल की बेंच ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एयरलाइंस कंपनी पर 44 हजार रुपये का हर्जाना लगाया।
यह था मामला
नीलबड़ निवासी वीणा वर्मा ने मेक माय ट्रिप इंडिया प्रायवेट लिमिटेड व सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड के खिलाफ 2022 में याचिका लगाई थी। इसमें शिकायत की थी कि उन्होंने सिंगापुर एयरलाइंस कंपनी की फ्लाइट से आस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन से दिल्ली आने के लिए 19 अगस्त 2019 को करीब 34 हजार रुपये में टिकट बुक कराई थी़, लेकिन उक्त दिनांक पर फ्लाइट से वापस दिल्ली नहीं आ सकीं। उन्होंने टिकट कैंसिल करा दिया। इसी बीच 21 अगस्त को महिला के पति की अचानक मौत हो गई। उन्हें बेटी के साथ आनन-फानन में वापस लौटना पड़ा।
यात्री पूरी राशि का हकदार
मेक माय ट्रिप का कहना था कि सहानुभूति पत्र मिलने पर यात्री टिकट की पूरी राशि पाने का पात्र है, लेकिन चूंकि टिकट एयरलाइंस से बुक हुई थी, इसलिए रिफंड वही देंगे। लंबे समय बाद एयरलाइंस ने 90 प्रतिशत काटकर केवल पांच हजार रुपये लौटाए।
मेक माय ट्रिप ने बताया कि टिकट निरस्त करते समय यात्री को ओपन फार चेंज का विकल्प दिया गया था, लेकिन महिला ने पति की मृत्यु के कारण अचानक खुद नया टिकट ले लिया। एयरलाइंस ने तर्क दिया कि उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई। आयोग ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए शेष 29 हजार रुपये और 15 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान का आदेश दिया।