लुधियाना: पंजाब में भारी बारिश के चलते चल रही छुट्टियां बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा न बनें, इसके लिए बेशक स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था कर दी है लेकिन इन ऑनलाइन क्लासेज में कई शरारती तत्व पढ़ाई का माहौल खराब कर रहे हैं। तकनीकी खामियों और लापरवाही का फायदा उठाकर कुछ बाहरी युवक क्लासेज में ऑनलाइन घुसपैठ कर रहे हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग कर माहौल बिगाड़ रहे हैं।
विभिन्न स्कूलों के अध्यापकों के साथ आज दूसरे दिन ही ऐसी कई घटनाएं घटीं जिसकी शिकायत अध्यापकों ने स्कूलों को करने के बाद साइबर सैल को भी करके बाकायदा स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। कई अध्यापकों ने बताया कि कई बार उनके स्कूल के शरारती विद्यार्थियों द्वारा क्लास लिंक दूसरों के साथ साझा किया जाता है जिससे बाहरी लोग इस लिंक के जरिए क्लास में जुड़ जाते हैं। ये लोग गालियां देते हैं, आपत्तिजनक वीडियो या चित्र दिखाते हैं और क्लास का अनुशासन पूरी तरह बिगाड़ देते हैं। एक अध्यापक ने बताया कि कई बार जैसे ही हम पढ़ाना शुरू करते हैं, अचानक कोई अज्ञात व्यक्ति गाली-गलौज करने लगता है। ऐसी स्थिति में बाकी बच्चे घबरा जाते हैं और क्लास का अनुशासन बिगड़ जाता है।
तकनीकी लापरवाही से बढ़ रही परेशानी
अध्यापकों के अनुसार, मीटिंग लिंक अक्सर व्हाट्सएप ग्रुप्स या सोशल मीडिया तक पहुंच जाता है और वहीं से शरारती युवक इसका गलत इस्तेमाल कर लेते हैं। एक अध्यापक ने कहा, “हम वेटिंग रूम और पासवर्ड जैसी सुविधाओं का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते क्योंकि तकनीकी जानकारी सीमित है। नतीजा यह होता है कि शरारती युवक आसानी से क्लास में घुस जाते हैं।” कई अध्यापकों ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में बच्चे होने के कारण कक्षा में अनुशासन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है और शरारतियों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर
इस तरह की घटनाओं का नकारात्मक प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। एक अध्यापक ने बताया, “अन्य बच्चे अचानक गंदी गालियां सुनकर डर जाते हैं और पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते। यह अनुभव उनके लिए मानसिक दबाव पैदा करता है।” एक अन्य अध्यापक ने कहा, “कई बार ये युवक अश्लील वीडियो या आपत्तिजनक चित्र भी साझा कर देते हैं। ऐसी घटनाओं से न केवल शिक्षक असहज महसूस करते हैं, बल्कि पूरी क्लास की गरिमा भी ठेस पहुंचती है।”
समाधान और ज़िम्मेदारी
अध्यापकों का मानना है कि समस्या का स्थायी हल तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने से ही संभव है। प्रत्येक ऑनलाइन क्लास के लिए अलग पासवर्ड रखा जाए और उसे नियमित रूप से बदला जाए। वेटिंग रूम का प्रयोग कर केवल पंजीकृत छात्रों को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए। एक शिक्षक ने कहा, “अगर संस्थान तकनीकी सुरक्षा पर ध्यान नहीं देंगे तो ऑनलाइन शिक्षा हमेशा असुरक्षित बनी रहेगी”। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि इस तरह के मामलों में तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को शिकायत दर्ज कराना आवश्यक है। इसके अलावा, शिक्षकों को बेसिक साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए और प्रत्येक क्लास में मॉनिटरिंग टीम की व्यवस्था की जाए। ऐसा करने से छात्र, शिक्षक और पूरे शिक्षा संस्थान के लिए ऑनलाइन शिक्षा सुरक्षित और प्रभावी बन सकती है।