केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों जवाब में कहा कि केंद्र सरकार ने निर्भया फंड को बंद नहीं किया है, बल्कि इस फंड के तहत केंद्र सरकार की ओर से 49 योजनाएं चलाई जा रही हैं. हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए वन-स्टॉप सेंटर भी इस फंड के जरिए चलाए जा रहे हैं, इसके माध्यम से एक ही छत के नीचे उन्हें सहायता प्रदान की जा रही है.
केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि निर्भया फंड के माध्यम से देश में कुल 49 से ज्यादा योजनाएं चलाई जा रही हैं और इसे कभी भी बंद नहीं किया गया है.
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान निर्भया फंड से विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को को 7,713 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इनमें से 76 फीसदी यानी करीब 5,846 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निर्भया फंड से पैसा मांग के अनुरूप आवंटित होता है. केंद्र सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से निर्भया कोष की स्थापना की की.
केंद्र का महिला सशक्तिकरण पर जोर
इससे पहल केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि पीएम मोदी ने हमेशा महिला सशक्तीकरण के महत्व पर जोर दिया है. इस फोकस को ध्यान में रखते हुए हम महिलाओं के विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और उन्नति सुनिश्चित करने के लिए 2014 से सरकार द्वारा की गई कई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “इन प्रयासों के तहत पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया.
उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं के लिए लिंग बजट में काफी वृद्धि हुई है.अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के लिए प्रतिबद्ध है.
महिलाओं के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका लक्ष्य बहुमत में उनकी भागीदारी है निर्भया फंड के तहत, 2014 से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित आवंटन के साथ लगभग 49 योजनाएं शुरू की गई हैं. 181 महिला हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है, हालांकि पश्चिम बंगाल ने अभी तक इस हेल्पलाइन को लागू नहीं किया है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से महिलाओं को लाभ मिल रहा है. यह योजना एक केन्द्र प्रायोजित डीबीटी योजना है, जिसमें गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के बैंक खाते में सीधे 5000 रुपये (तीन किस्तों में) की नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है.
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